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अभ्यर्थी संकलन (24 August 2019)

admin Abhiyarthi Sankalan, All

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का 66 साल की उम्र में निधन

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का 66 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनको बीते 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया था. उस समय उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. कुछ साल पहले ही उनकी बैरियाट्रिक सर्जरी की गई थी.

28 दिसंबर 1952 को नयी दिल्ली में जन्में जेटली न केवल एक चर्चित वकील रहे बल्कि वह संसद में सरकार के ‘संकट मोचक’ वक्ता के रूप में भी जाने जाते थे।

2-वर्ष 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित होने के बाद उन्हें आपातकाल के दौरान जेल में भी रहना पड़ा और इसके बाद धीरे-धीरे वह राजनीतिक की सीढ़िया चढ़ते हुए शीर्ष पर पहुंच गये। उन्होंने केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रालयों का प्रभार संभाला और वर्ष 2014 से 2019 तक भारत के वित्त एवं कॉपोर्रेट मामालों के मंत्री रहे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने हेतु विभिन्न घोषणाएं की गईं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेस करके देश की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए विभिन्न घोषणाएं की हैं. इन घोषणाओं में विदेशी और घरेलू निवेशकों पर सरचार्ज हटाने का फैसला किया गया. इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया कि सीएसआर कानून का उल्लंघन अब आपराधिक मामला नहीं होगा अब यह सिविल लायबिलिटी होगा.

स्टार्टअप्स और उसके निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स के प्रावधान को समाप्त किये जाने की घोषणा की गई. बैंकों को 70 हज़ार करोड़ रुपये मुहैया कराया जाएंगे ताकि वे ज्यादा से ज्यादा कर्ज दे सकें.

सबका विश्वास योजना

बजट 2019 में वित्त मंत्री ने सबका विश्वास योजना (Sabka Vishwas Scheme) 2019 की घोषणा की थी। केंद्र की इस योजना का उद्देश्य बकाया कर राशि वाले लोगों को आंशिक छूट देना और कर विवाद मामलों का जल्द-से-जल्द निपटारा करना है।

यह योजना 1 सितंबर 2019 से 31 दिसंबर 2019 तक कार्यान्वित होगी। सरकार को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में करदाता सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद कर से संबंधित अपने बकाया मामलो के समाधान के लिये इस योजना का लाभ उठाएंगे। गौरतलब है कि ये सभी मामले अब वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) अर्थात् GST के अंतर्गत सम्मिलित हो चुके हैं और इनके समाधान के परिणामस्वरूप करदाता GST पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

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