Competition Community

CGPSC Mains Study Material : Set-2

admin CGPSC Mains Study Material

समाजशास्त्र/प्रश्न प्रत्र – 6, भाग – 2

प्रश्र: सामाजिक स्तरीकरण का अर्थ एवं परिभाषा को समझाइये? (शब्द सीमा 25)

उत्तर:

सामाजिक स्तरीकरण समाज को उच्च एवं निम्न वर्गों में विभाजित करने और स्तर निर्माण करने की एक व्यवस्था है। स्तरीकरण शब्द समाजशास्त्र में भू-गर्भशास्त्र (Geology) से लिया गया है। भू-गर्भशास्त्र में मिट्टी व चट्टानों को विभिन्न स्तरों में बांटा जाता है। समाज में भी उसी प्रकार की अनेक सामाजिक परतें पायी जाती हैं। प्रत्येक समाज अपनी जनसंख्या को आय, व्यवसाय, सम्पत्ति, जाति, धर्म, शिक्षा, प्रजाति एवं पदों के आधार पर निम्न एवं उच्च श्रेणियों में विभाजित करता है। प्रत्येक विभाजन एक परत के समान है और ये सभी परतें जब उच्चता एवं निम्नता के क्रम में रखी जाती हैं तो सामाजिक स्तरीकरण के नाम से जानी जाती हैं।

विभिन्न विद्वानों ने सामाजिक स्तरीकरण को निम्न प्रकार से परिभाषित किया है|

जिसबर्ट के अनुसार,”सामाजिक स्तरीकरण समाज का उन स्थायी समूहों अथवा श्रेणियों में विभाजन है जो कि आपस में श्रेष्ठता एवं अधीनता के सम्बन्धों द्वारा सम्बद्ध होते हैं”।

CGPSC Mains Test Series 2020 & Downloadable Test Papers

Read More

भाषा (हिन्दी)/प्रश्न प्रत्र – 1), भाग – 1

“हिन्दी भाषा का विकासक्रम”

भारतीय आर्यभाषा संस्कृत से जन्मी हिन्दी भाषा विभिन्न पड़ावो को पार करती हुई विभिन्न भाषा प्रभाव से युक्त होती हुई अन्तत: हिन्दी भाषा का दर्जा प्राप्त करती है। इसका प्रयोग भारत प्रांत के भीतर था ईरानी के द्वारा स का उच्चारण ह होने से सिन्थ-हिन्द-हिन्दी भाषा कहलायी सिन्धु नदी के पश्चिम में रहने वाले लोगों ने सिन्धु नदी के पूर्व में रहने वाले निवासियों को हिन्दू कहा वह भू-भाग सिन्धु से हिन्दु तथा कहने वाले हिन्दी भाषी कहलाए जिसे प्राचीन हिन्दी को हिन्दुयी हिन्दुवि/हिन्दवी कहा गया। जिसमें अरबी- फारसी शब्दावली का प्रभाव होने से हिन्दुस्तानी नाम प्रचलित हुआ। संस्कृत प्रभावी हिन्दी हिन्दुई कहलायी जिसका विकासक्रम प्रभावित है संस्कृत आर्यभाषायी शब्दों का भारतीय भाषाओं तथा क्षेत्रीय विषयों में प्रभाव दिखाई देता है।

छ.ग. सामान्य अध्ययन (प्रश्न प्रत्र-6, भाग-3

प्रश्र: “उगादीपंडुम: भविष्यकथन का परब “ टिप्पणी करिये- (शब्द सीमा 75)

उत्तर:

भोपालपटनम का उगादीपंडुम: कोण्टा क्षेत्र के “मामिड़िपण्डुम” से मिलता-जुलता है। व दोनों ही क्षेत्रों में इस उत्सव का आयोजन वैशाख में होता है। भोपालपटनम- क्षेत्र में हर परिवार से एक पुरुष सदस्य व्रत रखता है, जब कि कोण्टा-क्षेत्र में व्रत रखने का अधिकार केवल पेड़मा को है। इस उत्सव में ग्रामदेवियों की उपासना की जाती है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए बकरी, सुअर या मुर्गी की बलि दी जाती है। बलि के बाद देवी को नया फल अर्पित किया जाता है और प्रसाद के रूप में किसानों को नये फल खाने की स्वीकृति मिल जाती है। गाँव का पेड़मा नाक्षत्रिक गणना के द्वारा आगामी वर्ष का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत करता है। गणना की यह प्रक्रिया कड़ाही में महुआ के फूलों के भूनने से प्रारंभ होती है। कड़ाही के साथ पानी भरा हुआ बड़ा दोना रखा रहता है और पेड़मा मंत्रोच्चार के सहित भुने। हुए महुए को उस दोने में डालता जाता है। यदि महुआ के फूल दोने के पानी में डूब जाते हैं। तो माना जाता है कि आगामी वर्ष पानी नहीं बरसेगा । यदि एक ही फूल डूबता है तो खण्ड वर्षा की सूचना मिलती है। दोनों फूलों के डूब जाने का अर्थ है सुवृष्टि।

CGPSC Mobile Course

भारतीय अर्थव्यवस्था/प्रश्न प्रत्र – 5, भाग -1

प्रश्न: एक अच्छे कर व्यवस्था के क्या गुण होते हैं? (शब्द सीमा 30)

उत्तर:
अच्छे कर व्यवस्था के गुण-
  1. न्यायसंगत
  2. दक्षतापूर्ण
  3. परिवर्तनीयता
  4. उत्पालवकता
  5. पारदर्शिता

You May Also Like..

CGPSC Mains Study material: Set-7

अंतर्राष्ट्रीय संबंध/प्रश्न पत्र-7, (भाग-2) प्रश्न: “ब्लू वाटर क्षमता” का क्या अर्थ है? इस प्रसंग में भारतीय नौसेना की ब्लू वाटर […]

CGPSC Mains Study material: Set-6

समाजशास्त्र/प्रश्न पत्र-6, (भाग-2) प्रश्र: सभ्यता और संस्कृति में अंतर स्थापित करते हुए चर्चा करें- (शब्द सीमा 100) उत्तर: सभ्यता एवं […]

CGPSC Mains Study material: Set-5

छ.ग. का सामाजिक परिदृश्य/प्रश्न पत्र-6, (भाग-3) प्रश्र: घोटुल पाटा क्या है? (शब्द सीमा 30) उत्तर: घोटुल पाटा मुरिया जनजाति द्वारा […]

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *