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CGPSC Mains Study material: Set-4

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छ.ग. का सामाजिक परिदृश्य/प्रश्न पत्र-6, (भाग-3)

प्रश्र: तीजन बाई के जीवन पर प्रकाश डालिये। (शब्द सीमा 125)

उत्तर:

नाम- तीजन बाई

जन्म- 24 अप्रैल 1956

स्थान- गनियारी ग्राम, भिलाई, छत्तीसगढ़

पिता- हुनुकलाल परधान

माता- सुखवती

जीवन परिचय- छत्तीसगढ़ की लोककला को विशेषत: पण्डवानी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का श्रेय तीजनबाई को जाता है। तीजन बाई को पण्डवानी की “कापालिक” शैली की गायिका माना जाता है।

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श्रीमती तीजन बाई को पण्डवानी गायन का शौक बचपन से ही था। उन्होंने पण्डवानी का औपचारिक प्रशिक्षण श्री उमैद सिंह देशमुख से पाया। जब वह अपने गुरु झाड़ू राम देवांगन जी को देखती, तो सोचा करती थीं कि वह भी ऐसी ही पण्डवानी गायिका बनेंगी । तीजन के घर में इसका काफी विरोध भी हुआ। घरवालों का विरोध सहकर भी तीजन ने पण्डवानी गायन को अपना क्षेत्र चुना।

पुरस्कार –

पद्मश्री पुरस्कार (1988)

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)

पद्मभूषण (2003)

नृत्य शिरोमणि पुरस्कार (2007)

फुकुओका पुरस्कार (2018)

पद्मविभूषण पुरस्कार (2019)

छ.ग. का इतिहास/प्रश्न पत्र-3, (भाग-3)

प्रश्न: रायगढ़ को शैलाश्रयों का जिला क्‍यों कहते हैं? (शब्द सीमा 60)

उत्तर:

रायगढ़ जिले में जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर विश्व का प्राचीनतम मानव शैलाश्रय सिंघनपुर स्थित है। 1910 ईस्वी में पुरातत्ववेत्ता एंडरसन ने सर्वप्रथम इन शैलचित्रों को देखा था और पंडित लोचन प्रसाद पांडे ने इसे प्रकाशित किया था। पूरे भारत में प्रागैतिहासिक मानव (एवमेन) व मृत्सांगना (मरमेड) का चित्र केवल सिंघनपुर शैलाश्रय में स्थित है। इस गुफा में प्रागैतिहासिक कालीन अनेक शैलचित्र अंकित हैं। इसके अतिरिक्त रायगढ़ के बसनाझर, करमागढ़, लेखाभाड़ा, ओंगना, वेनिपाट आदि स्थानों पर शैलाश्रयों की एक श्रृंखला मिली है इसलिए रायगढ़ जिला को शैलाश्रयों का जिला कहा जाता है।

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छ.ग. का इतिहास/प्रश्न पत्र-3, (भाग-3)

प्रश्न: छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख जल सत्याग्रह (water satyagrah) का वर्णन करें। (शब्द सीमा 175)

उत्तर:

प्रसिद्ध कंडेल नहर सत्याग्रह (जल सत्याग्रह) जुलाई 1920 को पं. सुंदरलाल शर्मा के नेतृत्व में किया गया था।

स्थान- कंडेल (कुरूद, धमतरी)

सहयोग- बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव, नारायण राव मैघावाले

कारण- शासन ने कण्डेल ग्राम के निवासियों पर नहर से पानी चोरी करने का आरोप लगाया था और उन पर 4033 रूपये का सामूहिक जुर्माना लगाकर उसकी वसूली हेतु वारंट जारी किया था। ग्रामवासियों ने पं. सुन्दरलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकारी अत्याचार के विरुद्ध सत्याग्रह किया और जुर्माने की राशि भुगतान नहीं करने का फैसला लिया।

परिणाम- आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी को सौपने की सूचना पाते ही रायपुर के सिटी कमीश्नर ने कण्डेल जाकर वस्तु स्थिति का जावजा लिया और अंतत: मनी की राशि माफ कर दी गई।

भाषा (हिन्दी)/प्रश्न पत्र-1 (भाग-1)

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