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CGPSC Mains Study material: Set-7

admin CGPSC Mains Study Material

अंतर्राष्ट्रीय संबंध/प्रश्न पत्र-7, (भाग-2)

प्रश्न: “ब्लू वाटर क्षमता” का क्या अर्थ है? इस प्रसंग में भारतीय नौसेना की ब्लू वाटर क्षमताओं का संवर्धन करने के लिए किए गए प्रमुख उपायों की पहचान कीजिए। (शब्द सीमा 175)

उत्तर:

सामुद्रिक अभियान के सामर्थ्य (matitime expeditionary capabilities) से युक्त नौसेना की खुले महासागर के गहरे जलीय क्षेत्रों (deep waters) में परिचालन करने की क्षमता को ब्लू वॉटर क्षमता कहा जाता है। हालांकि विशिष्टताएं अलग-अलग देशों के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं किन्तु अधिकांश नौसेनाओं का यह मानना है कि एक ब्लू-वाटर नौसेना खुले महासागरों में लंबे समय तक और निरंतर अभियानों का संचालन करने में सक्षम होती है। ऐसी नौसेना सुदूर सामुद्रिक क्षेत्रों में विश्वसनीय शक्ति प्रदर्शित करने में सक्षम होती है।

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ब्लू वाटर नौसेना की विशेषताएं –
  1. ब्लू वाटर सक्षम नौसेना के ऑपरेशन समुद्रवर्ती या तटीय क्षेत्र के बजाय वैश्विक होते हैं। इस क्षमता के कारण कोई देश अपनी घरेलू सीमा से कहीं दूर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने में सक्षम होता है।
  2. यह प्रमुख सामरिक जहाजों जैसे युद्धपोत/युद्धक क्रूजर, विमान वाहक पोतों और परमाणु पनडुब्बियों से लैस होता है। भारत ने 2007 के Maritime Capability Perspective Plan (समुद्री क्षमता परिप्रेक्ष्य योजना, 2007) के अंतर्गत ब्लू वाटर क्षमताओं को विकसित करने की अपनी आकांक्षा को रेखांकित किया था। भारतीय नौसेना को ‘ब्लू-वॉटर’ सक्षम बनाने हेतु किए गए विभिन्न उपाय निम्नलिखित हैं।
  3. भारतीय नौसेना सिंगल करियर टास्क फोर्स जैसे विमान वाहक INS विक्रमादित्य, और कई अन्य सतह एवं उप-सतह युद्धक पोतों जैसे वृहद बेड़े द्वारा संचालित हैं। रूस से एक अकुला-श्रेणी की परमाणु चालित युद्धक पनडुब्बी को लीज पर लेने के साथ ही भारतीय नौसेना वर्तमान में स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, INS अरिहंत का संचालन कर रही है।

छ.ग. का इतिहास/प्रश्न पत्र-3, (भाग-3)

प्रश्न: तीवरदेव के काल पर टिप्पणी करें। (शब्द सीमा 60)

उत्तर:

पांडुवंशीय शासक तीवर देव का शासनकाल 540-555 ई, तक था। अड़भार ताम्रपत्र के अनुसार उसने अपने राज्य का विस्तार उड़ीसा तक किया था, और कुछ समय के लिए उसने कलिंग पर भी राज्य किया था। इन्द्रबल के शासन के समय जो छोटा सा हिस्सा राज्य का था, तीवरदेव ने उसे सर्वाधिक फैला दिया था। कोसल और मैकल को जीतने के बाद तीवरदेव को सकलकोसलाधिपति की उपाधि से विभूषित किया गया था।

CGPSC Mains Mobile Course 2020

छ.ग. का इतिहास/प्रश्न पत्र-3, (भाग-3)

प्रश्न: कल्चुरीकाल के पृथ्वीदेव प्रथम की उपलब्धियां बताएं। (शब्द सीमा 60)

उत्तर:

कल्चुरी नरेश रत्नदेव प्रथम के पुत्र पृथ्वीदेव प्रथम का शासनकाल 1065-95 ई. तक था। उसने तुम्माण में पृथ्वीदेवेश्वर मंदिर और रतनपुर में तालाब का निर्माण कराया था। पृथ्वी देव प्रथम के अमोदा ताम्रपत्र में उसे महामंडलेश्वर एवं पंचमहाशब्द कहा गया हैं। वह 21,000 गांवों का स्वामी था, जिससे उसने सकलकोसलाधिपति की उपाधि धारण की थी, पाण्डु वंश के तीवरदेव ने भी सकलकोसलाधिपति की उपाधि धारण की थी।

भाषा (हिन्दी)/प्रश्न पत्र-1, (भाग-1)

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3 Comments

  1. This is really a phenomenal job by all team of competition community.
    Sir your approach to any aspects of topic of cg psc is remarkable.

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