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CGPSC Mains Study material: Set-8

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छ.ग. का इतिहास/प्रश्न पत्र-३, (भाग-3)

प्रश्न: मंदिर स्थापत्य में प्राचीन काल की अपेक्षा कल्चुरियों का काल अधिक उत्कृष्ट था? समझाइये। (शब्द सीमा 60)

उत्तर:

छत्तीसगढ़ में मंदिर वास्तु का प्रारम्भ लगभग 5वीं शताब्दी से हुआ था, उस समय यहां शरभपुरी वंश का शासन था। कल्चुरी काल से पूर्व 6वीं से 9वीं शताब्दी तक यहां ईटों के मंदिरों के निर्माण की एक श्रृंखला दिखाई पड़ती है, जिसके भू-विन्यास में गर्भ गृह, अन्तराल एवं स्तंभों पर आधारित मण्डप सामान्य रूप से मिलते है। किन्तु कल्चुरियों के शासन काल में पाषाण निर्मित मन्दिरों का प्रचलन प्रारंभ हुआ। कल्चुरी स्थापत्य की अपनी एक स्वतंत्र शैली थी, जिसका काल 1000-1400 ई. निर्धारित किया गया है। इस काल के मंदिरों में वर्गाकार गर्भगृह, अत्यंत अलंकृत तथा अनेक शाखाओं से निर्मित गर्भगह के प्रवेश द्वार, मंदिर के प्रवेश द्वार पर गजलक्ष्मी अथवा शिव की प्रतिमा, गर्भगृह तथा मंडप के बीच अन्तराल का निर्माण आदि विशेषता पायी जाती है।

भाषा (हिन्दी)/प्रश्न पत्र-1, (भाग-1)

“व्यंजन”

स्वर की सहायता से पूर्ण होने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते इन्हे हलन्तम् भी कहा जाता है।

प्रकार-

1) स्पर्श – कंठव्य, तालव्य, मूर्धन्य, दन्तव्य, ओष्ठय

2) अन्तःस्थ

3) ऊष्म (संघर्षी)

4) संयुक्‍त व्यंजन

यह सभी अन्त: प्रयत्न के आधार पर है। बाह्य प्रयत्न के आधार पर

1) अल्पप्राण, 2) महाप्राण, 3) सघोष, 4) अघोष

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अंतर्राष्ट्रीय संबंध/प्रश्न पत्र-7, (भाग-2)

प्रश्न: विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के प्रमुख समझौतों की सूची बनाते हुए TRIMs को समझाइये। (शब्द सीमा 175)

उत्तर:

विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के समझौते-

  1. कृषि में व्यापार (Trade in Agriculture)
  2. व्यापार सम्बन्धित बौद्धिक सम्पदा अधिकार [Trade Related Property Rights (TRIPS)]
  3. व्यापार सम्बन्धित निवेश उपाय (TRIMs)
  4. व्यापार और सेवाओं पर सामान्य समझौता (General Agreement on Trade and Service)

व्यापार सम्बन्धित निवेश उपाय (TRIMs)-

जो केवल वस्तुओं के व्यापार सम्बन्धी निवेश उपायों पर लागू होते हैं, एक क्षीण समझौता है। यह विदेशी निवेश की बाधाओं को दूर करने की व्यवस्था करता है जो स्वतंत्र व्यापार में बाधा बनते है, उत्पादन की शर्तों को प्रभावित करती है तथा लागतों और कीमतों को प्रभावित करते है।

निवेश पर ये बाधाएं अधिकतर विकासशील देशों में पायी जाती हैं और स्वतंत्र एवं बिना रुकावट विदेशी पूजी के बहाव के विरुद्ध होती हैं इसके अतिरिक्त, यह बाधाएं शर्तों के रूप में होती हैं जिन्हें विदेशी निवेशकों को प्रवेश प्राप्त करने से पहले पूरा करना पड़ता है ।

ये शर्तें हैं-
  1. विदेशी निवेशकों को राष्ट्रीय व्यवहार तथा सभी सुविधाएं देना जो घरेलू निवेशकों को उपलब्ध हैं ।
  2. बाहरी निवेशकों को मेजबान देश के प्राथमिकतापूर्ण क्षेत्रों में निवेश के लिये विवश न करना और
  3. विदेशी निवेशकों को सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराना ताकि वैश्विक उत्पादन और रोजगार के स्तर में वृद्धि हो तथा उससे सदस्य देशों के भुगतानों के सन्तुलन को राहत मिले।
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संक्षेप में, W.T.O. के अन्तर्गत ट्रिम्स (TRIMs) की व्यवस्था विदेशी निवेशकों को विश्व में किसी भी स्थान पर तथा किसी भी आर्थिक गतिविधि में निवेश का अवसर देती है । इसके अतिरिक्त समझौता सुनिश्चित करता है कि सभी इकाईयां वह देशी हो अथवा विदेशी एक समान समझी जायेंगी तथा नियमों और नीतियों के सन्दर्भ में किसी से कोई भेदभाव नहीं होगा| तथापि, निर्यात दायित्वों को पूरा करने के लिये शर्तें लगाई जा सकती हैं ताकि ऐसे उद्यमों के लिये विदेशी विनिमय के बहिर्वाह और अन्तर्वाह का सन्तुलन बना रहे।

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