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CGPSC Mains Study material: Set-8

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छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य/प्रश्न पत्र-6, (भाग-3)

प्रश्न: घोटुल नामक संस्था सामाजिक सरोकारों से जुडी हुई है चर्चा करें- (शब्द सीमा 175)

उत्तर:

धोटुल को आरम्भ से ही एक प्रभावी और सर्वमान्य सामाजिक संस्था के रूप में मान्यता मिलती रही है इसे एक ऐसी संस्था के रूप में देखा जाता रहा है, जिसकी भूमिका गोंड जनजाति की मुरिया शाखा को संगठित करने में प्रभावी रहा है। यों तो मोटे तौर पर घोटुल मनोरंजन का केन्द्र रहा है, जिसमें प्रत्येक रात्रि नृत्य, गीत गायन, कथा-वाचन एवं विभिन्न तरह के खेल खेले जाते हैं। किन्तु मनोरंजन प्रमुख नहीं अपितु गौण होता है मुख्यतः यह संस्था सामाजिक सरोकारों से जुडी होती है।

  1. संगठन की भावना को बल दिया जाता है।
  2. गॉवके सामाजिक कार्य (विवाह, मृत्यु, निर्माण-कार्य आदि) में श्रमदान किया जाता है।
  • युवक-युवतियों को सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की शिक्षा दी जाती है।
  • भावी वर-वधू को विवाह-पूर्व सीख दी जाती है।
  • हस्त-कलाओं का ज्ञान कराया जाता है।
  • गाँव में आयी किसी विपत्ति का सामना एकजुट हो कर किया जाता है।
  • वाचिक परम्परा का नित्य प्रसार किया जाता है।
  • अनुशासित जीवन जीने की सीख दी जाती है
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छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य/प्रश्न पत्र-6, (भाग-3)

प्रश्न: टिप्पणी करे – जनजातियों के युवा गृह। (शब्द सीमा 60)

उत्तर:

बहुत सी जनजातियों में युवाओं के मिलने-जुलने और मनोरंजन के लिए युवा गृह की परंपरा है. इन युवागृहों में जीनवसाथी का चुनाव भी होता है. मोटे तौर पर घोटुल मनोरंजन का केन्द्र रहा है, जिसमें प्रत्येक रात्रि नृत्य, गीत गायन, कथा-वाचन एवं विभिन्न तरह के खेल खेले जाते हैं। किन्तु मनोरंजन प्रमुख नहीं अपितु गौण होता है | प्रमुखत: यह संस्था सामाजिक सरोकारों से जुडी होती है।

प्रमुख युवा गृह – 1) मुड़िया – घोटुल, 2) उंराव – धुमकुरिया, 3) भारिया – रंगबंग, 4) बिरहोर – गितुओना

छ.ग. का भुगोल/प्रश्न पत्र-5, (भाग-3)

प्रश्र: बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य पर संक्षिप्त टिपण्णी लिखिए। (शब्द सीमा 175)

उत्तर:

यह अभ्यारण महासमुंद जिले के उत्तरी भाग में राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर पटेवा से 17 किलोमीटर दूर महानदी के तट पर स्थित है। इसकी स्थापना 1976 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत की गई थी। यह अभ्यारण्य समतल और पहाड़ी क्षेत्र का मिश्रण है जिसका संपूर्ण क्षेत्रफल 244.66 वर्ग किलोमीटर है।

जीव-जंतु-

इस अभ्यारण्य में सर्वाधिक मात्रा में हिरण पाए जाते हैं इसके अतिरिक्त यहां बाघ, तेंदुए, जंगली भैंसे, टाइगर्स, आलसी भालू, फ्लाइंग गिलहरी, गीदड़, तेंदुए, चिंकारा, काला बाघ, जंगली बिल्ली, बार्किंग डीयर, बंदर, चीतल आदि वन्य प्राणी पाए जाते हैं।

वनस्पति-

बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में वनस्पति मुख्यतःसागौन, साल, बांस की प्रमुख पेड़ है इन पेड़ों के साथ उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन भी शामिल है। अन्य प्रमुख पौधों में जैसे शीसम, महुआ, बेर और तेंदु का पेड़ शामिल हैं। इन सभी पेड़ों की अमीर और रसीला वनस्पति के साथ यह अभ्यारण्य वन्य जीवन की एक विस्तृत विविधता का समर्थन करता है।

अन्य दर्शनीय स्थल-

इस अभ्यारण के बीचो-बीच बलमदेई नदी गुजरती है तथा यहां देवधारा जलप्रपात स्थित है।

तुरतुरिया आश्रम, छाता पथरा, सिद्धखोल तथा मातागढ़ आदि।

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भाषा (हिन्दी)/प्रश्न पत्र-1, (भाग-1)

“वर्तनी”

उच्चारण स्वरूप लेखन की प्रक्रिया वर्तनी शासन द्वारा मान्य प्रविधि उच्चारण लेखन का बिना किसी त्रुटि के प्रयोग शिक्षित वर्ग द्वारा प्रभाव मानक वर्तनी कहलाती है जिसका प्रयोग वर्तनी शुद्धिकरण को प्रभावित करता है।

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